तहज़ीब की खातिर… तहज़ीब को रोशन करने वाले मेहताब को मिला वाहिद प्रेमी अवार्ड

भोपाल: शहर की तहजीब को एक नए रंग ओ अंदाज में पेश करने का कारनामा अंजाम उन्होंने दिया है। यहां के गुमनाम हो चुके गली, मुहल्ले, चौक चौराहों के इतिहास को भी उन्होंने उकेरा है। विलुप्त होती इस शहर की संस्कृति और रस्म ओ रिवाज पर भी उन्होंने नजर दौड़ाई है। मेहताब आलम की तहजीब नवाबों, झीलों, खूबसूरत वादियों के शहर भोपाल को अपनी यहां मौजूदगी का एक मुकम्मल तोहफा दिया है।

खुशबू कल्चरल सोसायटी द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में वक्ताओं ने ये बात कही। उर्दू के सीनियर जर्नलिस्ट डॉ मेहताब आलम द्वारा लिखित पुस्तक तहजीब को केंद्रबिंदु रखकर आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में शहर के नामवर शायर और साहित्यकार मौजूद थे। जिन्होंने तहजीब के एक एक पन्ने पर उकेरी गईं बातों का जिक्र भी किया, उसकी तारीफ भी की। उन्होंने मेहताब आलम के चीजों को जानने, समझने, उन्हें अपने भीतर तक जज्ब करने और फिर उसको कलमबंद कर किताब की शक्ल देने की काबिलियत पर भी दिल खोलकर बात की। डॉ मेहताब आलम की इस नई पेशकश के लिए आयोजक संस्था खुशबू कल्चरल सोसायटी ने वाहिद प्रेमी अवार्ड से नवाजा। कार्यक्रम में संस्था के साजिद प्रेमी के अलावा डॉ नौमान खान, जफर सेहबाई, डॉ अंजुम बाराबंकवी, परवीन कैफ इकबाल मसूद, शोएब अली खान, कमर अली शाह, बद्र वास्ती आदि मौजूद थे। इस मौके पर एक मयारी मुशायरे का आयोजन भी किया गया। देर रात तक चले इस मुशायरे का लुत्फ लेने के लिए बड़ी तादाद में श्रोता मौजूद थे।


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