लॉक डाउन रिटर्न : फिर तैयार हो रहीं मददगार टोलियां

भोपाल:फिर लॉक डाउन, फिर मुश्किलें, फिर जरूरतें… सरकार प्रशासन की बे भरोसा व्यवस्थाएं… व्याकुल दिखाई देते लोग…! पिछले लॉक डाउन में मैदान सम्हालने वाली मददगार टोलियों की तरफ उम्मीद भरी नजरें उठने लगी हैं। मददगार बैठकों में व्यस्त हो गए हैं। इस रविवार महज व्यवस्था की निगरानी और अगली बार से कुछ जमीनी करने की तैयारी।

पिछले साल के लॉक डाउन के दौरान जरूरतमंदों के लिए मैदान सम्हालने वालों ने न सिर्फ लोगों को भुखमरी के हालात में पहुंचने से बचाया था, बल्कि शासन प्रशासन की नाक कटने से भी बचाया था। इस लॉक डाउन के दौरान मदद के लिए क्या रणनीति बन रही है,

हमने जाना कुछ चुनिंदा मददगार टीमों के अगुआओं से :

अगले हफ्ते सम्हालेंगे मैदान : सिकंदर

पिछले लॉक डाउन के दौरान पुराने शहर में करीब सात किचन सेंटर्स के जरिए शहर के करीब २५०० लोगों को रोज खाना पहुंचाने वाली सत्याग्रह टीम ने रविवार को बैठक कर आगामी योजना को आकार दिया है। टीम के अगुआ शाहवेज सिकंदर का कहना है कि इस हफ्ते पूरे शहर का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया गया है। शासन प्रशासन द्वारा किए गए इंतजामों को टटोल रहे हैं। अगले हफ्ते से लॉक डाउन की स्थिति निरंतर रहती है तो उनकी टीम अस्पतालों, रैन बसेरा और सड़क किनारे मौजूद लोगों को खाने के पैकेट पहुंचाने की व्यवस्था करेगी। सत्याग्रह टीम में नवेद खान, आतिफ उल हसन, उमर असलम, आमिर जैद, जीतू कुमार, अजय शर्मा आदि शामिल हैं।

एक्शन एड फिर तैयार : सारिका

शहर की कई बस्तियों, फुटपाथ, प्रवासी मजदूरों आदि तक राशन पैकेट, दवाइयां, चप्पलें, कपड़े और मेडिकल चेक अप की सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली संस्था एक्शन एड ताजा हालात में भी अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार है। संस्था के सारिका सिंह और सैयद फैज अली का कहना है कि पिछले लॉक डाउन में कुछ पिछड़ी बस्तियों को चिन्हित कर यहां जरूरत का सामान पहुंचाया गया था। करीब २५ लाख रुपए से ज्यादा खर्च पर जरूरतमंदों की मदद की गई थी। उन्होंने बताया कि टीम के शिवानी, सोमिया आदि मेंबर नए लॉक डाउन के हालात पर नजर रखे हुए हैं। तय किया गया है कि स्थितियां पिछली बार की तरह बनती हैं तो एक बार फिर बस्तियों, फुटपाथ और जरूरी सेवा में तैनात लोगों के लिए मदद के लिए निकलेंगे।

सरकारी व्यवस्था पर भरोसा नहीं : मिर्जा इकबाल

निजी संस्थाओं, सहयोग के लिए निकले लोगों और सड़क पर आकर काम करने वाले लोगों के काम पर सरकारी ठप्पा लगाने के प्रयास पिछली बार किए जा चुके हैं। जबकि साथ साथ रोजा इफ्तार टीम ने पूरे लॉक डाउन काल में लोगों को जरूरत का राशन पहुंचाया था। संस्था के मिर्जा इकबाल बेग कहते हैं कि असल मकसद लोगों को मदद पहुंचना है लेकिन शासन प्रशासन को आम लोगों द्वारा किए जा रहे कामों को प्रोत्साहित करना चाहिए और जरूरी मदद भी दी जाना चाहिए। इकबाल ने बताया कि हर हफ्ते होने वाले लॉक डाउन में भी लोगों को कई परेशानियां आएगी। इसके लिए टीम तैयार की जा रही हैं, ताकि किसी गरीब को भूख की शिद्दत से तड़पना न पड़े।

सार्थक दिखा रहा सार्थकता : शैलेंद्र दुबे

रविवार को परीक्षाओं के लिए शहर आए बाहरी स्टूडेंट्स और फुटपाथ पर बसर करने वाले लोगों को खाना पहुंचाने की जिम्मेदारी सामाजिक संस्था सार्थक द्वारा निभाई जा रही है। पूरा साल हर दिन अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को खाना पहुंचाने में तैनात रहने वाले सार्थक टीम के शैलेंद्र दुबे, शैलजा दुबे, अर्पित तिवारी श्रुति मिश्रा ने बताया कि हालात को देखते हुए इस रविवार को खाने के अतिरिक्त पैकेट तैयार कर लिए गए थे। जो स्टूडेंट्स और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाए गए हैं। शैलेंद्र ने बताया कि उनकी टीम ने लॉक डाउन के दौरान करीब १७०० राशन पैकेट वितरित किए थे। जरूरतमंद बीमारों को इस दौरान ६०० यूनिट ब्लड का इंतजाम भी कराया गया था। साथ ही प्रशासन की मदद से कई बीमारों को अस्पताल तक पहुंचने में मदद भी की गई थी।

इस रविवार सम्हाला मोर्चा

रविवार को लॉक डाउन के दौरान बैरागढ़ के सिंधी समाज ने लालघाटी और आसपास के लोगों को खाना पहुंचाने में मदद की है। इधर हमीदिया रोड गुरुद्वारा कमेटी ने हमीदिया रोड, नादरा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि पर मौजूद जरूरतमंद लोगों को खाना पहुंचाया। नगर निगम और जिला प्रशासन की टीमें भी व्यवस्था में जुटी हैं।


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